‘अब आसान नहीं होगा 5वीं और 8वीं पास करना ‘


देहरादून:उत्तराखंड में अब 5वीं और 8वीं पास करना आसान नहीं होगा. बुधवार को त्रिवेंद्र कैबिनेट ने अहम फैसला लेते हुए 5वीं और 8वीं क्लास में अनिवार्य रूप से बच्चों को पास किये जाने के नियम में बदलाव कर दिया है. जिसके बाद अब बच्चों को पांचवी और आठवीं पास करने के लिए और मेहनत करनी पड़ेगी. राज्य सरकार इसके लिए बोर्ड या फिर इसके बराबर स्तर की परीक्षा तैयार करने जा रही है.
एक बार फेल होने पर फिर से परीक्षा दे सकते हैं छात्र
अभी तक शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 8वीं तक के हर बच्चे को पास करने की प्रक्रिया है. लेकिन, अब उत्तराखंड में इस नियम में बदलाव कर दिया गया है. सरकार ने यह सख्ती 5वीं और 8वीं क्लास पास करने के लिए कर दी है. अब छात्रों को बोर्ड या इसके समकक्ष एक एग्जाम देना होगा. इसमें पास होने पर ही पास किया जाएगा. हालांकि, सरकार ने बच्चों को थोड़ी राहत देते हुए परीक्षा में फेल होने की स्थिति में दोबारा परीक्षा देने का नियम भी बनाया है ताकि साल बर्बाद न हो.
शिक्षा स्तर में सुधार करना पहली प्राथमिकता
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि पिछले कई वर्षों में राज्य में शिक्षा स्तर में गिरावट देखी गई है. शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए यह जरूरी है कि 5वीं और 8वीं कक्षा के बच्चों पर ज्यादा ध्यान दिया जाये. शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले भी इस प्रकार की व्यवस्था थी. लेकिन, 8वीं तक फेल न किये जाने के नियम से सकारात्मक परिणाम नहीं दिखा. सरकार ने शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के मकसद से नई पहल की है. अगले साल से बोर्ड या उसके समकक्ष परीक्षा आयोजित की जायेगी.
क्या नई व्यवस्था से सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था ?
गौरतलब है कि उत्तराखंड में सबसे बड़ा शिक्षा विभाग है. पिछले 20 साल में हर सरकार ने गांव-गांव तक स्कूल खोल दिये. लेकिन इस विभाग की हालत में कोई सुधार दिखाई नहीं दिया. अब त्रिवेंद्र सरकार ने 8वीं तक फेल न किये जाने जैसे महत्वपूर्ण नियम में बदलाव तो कर दिया है. देखना यह है कि क्या इस परिवर्तन के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव दिखाई देता है या फिर यह फैसला ही अंधेरे में तीर मारने जैसा साबित हो पाता है.

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