कल मनाया जाएगा देश पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले का जन्म दिवस

रामनगर(नैनीताल)देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्म दिवस पर 3 जनवरी को दिन में 11 बजे महिला एकता मंच द्वारा ग्राम सावल्दे पूर्वी में सभा व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
मंच की संयोजक ललिता रावत ने कहा कि
देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले का नाम देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने तथा उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपना समूचा जीवन समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के एक किसान परिवार में जन्मी सावित्रीबाई फुले का विवाह मात्र 9 वर्ष की उम्र में ज्योतिबा फुले के साथ हो गया था। ज्योतिबा फुले ने उन्हें शिक्षित-प्रतिक्षित किया तथा महिलाओं को शिक्षा देने के लिए प्रेरित किया।
सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों को शिक्षित करने के लिए जनवरी, 1848 को पुणे में पहला कन्या स्कूल खोला। धर्मग्रंथो में महिलाओं को शिक्षा की इजाजत नहीं होने के कारण, समाज का एक हिस्सा उनके खिलाफ हो गया। जब वह पढ़ाने के लिए स्कूल जाती थीं तो लोग उनके ऊपर कीचड़ फेंकते थे, उनको ताने मारते थे ताकि वे लड़कियों को शिक्षित-प्रशिक्षित करना बंद कर दें। अपने उद्देश्य के लिए दृढ़ संकल्प सावित्रीबाई ने इस सबसे हार नहीं मानी। उनसे निबटने के लिए सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में रखकर ले जातीं तथा स्कूल पहंुचकर गन्दी साड़ी बदलकर लड़कियों को शिक्षा देती थीं।

महिला नेत्री कौशल्या ने कहा कि सवित्रीबाई फुुले ने देश में महिलाओं को शिक्षित व सबल बनाने का जो बीड़ा उठाया था, वह आज भी अधूरा है। महिलाओं के साथ अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को संघर्ष के लिये आगे आने की जरुरत है। उन्होंने क्षेत्र की जनता से 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस कार्यक्रम में भागीदारी करने की अपील की है।

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