सीनियर IFS राजीव भरतरी को राज्य के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक का जिम्मा,भरतरी को जिमेदारी से IFS लॉबी के एक हिस्से में दबी जुबान से विरोध

वन मंत्री हरक सिंह रावत ने उत्तराखंड में मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक की कुर्सी पर सभी कयासों को दरकिनार करते हुए राजीव भरतरी की नियुक्ति की है. हाल ही में सेवानिवृत हुए डीबीएस खाती के स्थान पर उनको फिलहाल चार्ज दिया गया है. हालाँकि उन्हें स्थायी रूप से इस पद पर काम करने का मौका मिलेगा इसको लेकर कई तरह के कयास लगाये जा रहे हैं 

भरतरी के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक पद पर नियक्ति से वन्यजीव प्रेमियों के अलावा पर्यटन से जुड़े लोग खुश नजर आ रहे हैं, क्यूंकि कॉर्बेट पार्क के उपनिदेशक और निदेशक के रूप में उनका करीब ८ साल का कार्यकाल उपलब्धि भरा रहा था और उन्हें वन विभाग के स्टाफ के अलावा मीडिया और स्थानीय ग्रामीणों का खासा समर्थन हासिल रहा था. 

ईमानदार छवि के भरतरी को उनके विभाग के आईएफएस की ताकतवर लॉबी बिलकुल पसंद नहीं करती, यही वजह है कि कॉर्बेट से जाने के बाद करीब आठ साल से उन्हें किसी अहम् जिम्मेदारी पर नहीं रखा गया

चीफ कुमाऊँ और चीफ गढ़वाल के पद पर उनके सशक्त दावे के बावजूद उन्हें कम महत्व के पद दिए गये और एक तरह से उन्हें हाशिये पर रखा गया, इसी दौरान वह अमेरिका के विश्विद्यालय से  phD करने स्टडी वीजा पर चले गये . वीजा अवधि समाप्त होने के बाद उन्होंने फिर से वन विभाग में नियुक्ति ली तो प्रमुख वन संरक्षक वन पंचायत का कार्यभार मिला, इसके अलवा वह नियोजन व वित्त का कार्यभार भी देख रहे थे. खाती के रिटायर होने के बाद राजीव भरतरी की काबिलियत को देखते हुए उन्हं वन्य जीव महकमे का मुखिया के रूप में काम करने को कहा गया है. अपर प्रमुख सचिव वन रणवीर सिंह ने इस आशय का आदेश जारी किया है  इससे पहले इस पद पर कुछ अन्य अन्य नामों की चर्चा थी. किन्तु सूत्रों के मुताबिक वन मंत्री हरक सिंह ने राजीव भरतरी की योग्यता, पुराने अनुभव और एक्सपोजर को देखते हुए अन्य लोगों पर वरीयता दी है. हालाँकि अंदरखाने इस फैसले के खिलाफ वन विभाग के अफसरों की एक लॉबी जुट गयी है और किसी प्रकार से इस फैसले को बदलवाने की कोशिश की जा रही है.

वन विभाग में ताकतवर रही इस लॉबी को इस अहम् पद पर भरतरी की नियुक्ति गवारा नहीं है, किन्तु भरतरी की कार्यशैली से वाकिफ लोगों के अनुसार राज्य सरकार का यह निर्णय अच्छा है और जहाँ उत्तराखंड में वन विभाग और वन्य जीव आम लोगों और विकास कार्यों  के बीच चुनौतीपूर्ण हालात में हैं ऐसे में बड़ी कुर्सी पर किसी संवेदनशील अधिकारी की नियुक्ति स्वागतयोग्य कदम माना जा रहा है. 

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