उत्तराखंड में राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग पर हाईकोर्ट की रोक

गर्मियों के मौसम में हर कोई उत्तराखंड में जाने की प्लानिगं करता है। उत्तराखंड में घूमने का अपना एक अलग ही मजा आता है। यहां जाने के लिए हर कोई तैयार रहता है। खासतौर पर उत्तराखंड में जाने का और वहां के नजारों को देखने का अपना एक अलग ही मजा होता है। ऐसे में अब उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों को एक धक्का सा लगा है। जिस वजह से पर्यटक घूमने के लिए उत्तराखंड में घूमने के लिए आते थे। अब उसी को बैन कर दिया गया है।हाल ही में उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश में पर्यटक घूमने के लिए आते थे। पर्यटक यहां पर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग के लिए अते थे। पर साथ में ही इसी के बहाने कैंप भी लगाते थे।इसके बारे में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आदेश दिया गया है कि जिसमें कहा गया कि रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य वाटर स्पोर्ट पर पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। इसके लिए हाईकोर्ट के द्वारा कई रूल बनाने के निर्देश दिया गया है।आपको बता दें कि इसका फैसला वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के सामने लिया गया है। इसके बारे में ऋषिकेश निवासी हरिओम कश्यप ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें सरकार ने 2014 में भगवती काला व वीरेंद्र सिंह गुसाईं को राफ्टिंग कैंप लगाने के आदेश दिए थे। पर जिसके बाद उन्होनें इसके नियम को नजरअंदाज कर दिया गया है।आज के समय में पर्यटक घूमने के लिए यहां आते हैं पर राफ्टिंग के बहाने यहां पर कैंप लगा देते हैं और धीरे-धीरे यह समय के साथ बढ़ता जा रहा है। यहां पर्यटक आते हैं जिसके बाद गंगा नदी के किनारे पर बैठ कर गंदा पानी, कूड़ा, मांस -मदिरा आदि गंगा नदी में डालते हैं।जिसके बाद देखने को मिल रहा है कि यह पर्यावरण को दूषित कर रहा है। पर अब बैन लग जाने से पर्यटकों को निराशा का सामना करना पड़ सकता है।

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