तो बाढ़ में बह जाएगा रामनगर का यह इलाका?

उत्तराखंड के सरकारी विभागों में आपसी तालमेल नही है।विभागीय अधिकारी एक दूसरे से अहम की लड़ाई लड़ते दिख रहे है।सरकार के विभागों में आपसी तालमेल न होने की वजह से जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विकास कार्य ठप्प हुए पड़े है।ऐसा ही एक मामला प्रदेश के जनपद नैनीताल के रामनगर क्षेत्र का है जहां सिचाई विभाग और वन विभाग में छत्तीस का आंकड़ा है।सिचाई विभाग के ज्यादातर काम वन विभाग के अपर कोसी में होने होते है लेकिन वन विभाग रूकावट बन जाता है।कोसी नदी किनारे बसे पम्पापुरी,भरतपुरी,दुर्गापुरी,कौशल्यापुरी और टेढा गांव को बाढ़ से बचाने के लिए बाढ़ सुरक्षा के काम होने है।सरकार ने स्थानीय लोगो के लंबे संघर्ष के बाद नाबार्ड से 7 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर सिचाई विभाग को दिए है।सिंचाई विभाग ने बाढ़ सुरक्षा के काम को कराने के लिए फिलहाल अभी साढ़े 4 करोड़ रुपये के टेंडर भी करा दिए है।लेकिन बाढ़ सुरक्षा का काम शुरू नही हो पाया है।जबकि मानसून सर पर है।कोसी में बाढ़ के आने से पहले सभी सुरक्षा के काम हो जाना चाहिए था।समय पर बाढ़ सुरक्षा का काम शुरू न होने पर BJP के नेता गणेश रावत के नेतृत्व में स्थानीय लोगो ने सिचाई विभाग का घेराव किया है।उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 3 दिन में विभाग ने काम शुरू नही कराया तो 3 दिन बाद वह विभाग में तालाबंदी करेंगे।

सिचाई विभाग इस देरी के लिए वन विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहा है।उसका कहना है कि वन विभाग उनको काम नही करने दे रहा है।उसके प्रस्तावित कई कामों पर वन विभाग ने अड़ंगा लगा रखा है।सिचाई विभाग ने इस संदर्भ में DM से हस्तक्षेप की मांग की है।बताया जा रहा है कि जब से रामनगर वन प्रभाग में DFO के पद पर नेहा वर्मा की तैनाती हुई है तब से अपर कोसी क्षेत्र में सिचाई विभाग के काम प्रभावित हो रहे है।कुल मिलाकर दो विभागों की इस रस्साकसी में जनता का खासा नुकसान हो रहा हैं और अधिकारी जनसेवक नही बल्कि हिटलर बन कर काम कर रहे है।

 

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